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100 फिल्मों के बाद भी ढाबे पर काम करने लगे थे संजय मिश्रा, 1999 वर्ल्ड कप ने बदली जिंदगी

आज हम आप को बॉलीवुड के ऐसे महँ इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं जसिके बारे में शायद ही आप को मालुम होगा |जी हाँ आज हम जिसकी चर्चा कर रहे हैं वो भले ही बॉलीवुड के टॉप सितारों में नहीं हैं लेकिन वह बॉलीवुड में सबसे काबिल सितारों में जरूर होने जाते हैं |आज हम बात कर रहे हैं संजय मिश्रा की ,इन्होने अपने करियर की शुरुवात 1991 में आये एक टीवी शो ‘चाणक्य’ से की थी लेकिन शो से ब्रेक मिलने के बाद संजय को एहसास हुआ की ये वो काम नहीं हैं जसिके लिए वे इंडस्ट्री में आये थे |

1999 वर्ल्ड कप विज्ञापन टर्निंग प्वाइंट रहा

अगर आप क्रिकेट की दीवाने हैं तो आप टीवी की बहुत ह फेमस ऐड मौका मौका तो याद ही होगी |जी हाँ उसी तरह से 1999 में एक ऐड आयी थी उस ऐड में स्नजय ने एप्पल सिंह का किरदार निभाया था |वो ऐड इतनी फेमस हुई थी की उस ऐड के बाद सभी लोग संजय को एप्पल सिंह के नाम से जानने लगे |

ऑफिस ऑफिस के शुक्ला जी

हास्य-व्यंग्य से भरपूर ऑफिस-ऑफिस में निभाया शुक्ला जी का किरदार भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके बाद संजय ने करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया लेकिन ‘मसान’ और ‘आंखों देखी’ फिल्मों में उनके जबर्दस्त अभिनय की तारीफ उनके आलोचकों ने भी की|

एक वो समय जिस दौरान ढाबे पर करते थे संजय

संजय के पिता की मोत के बाद वह बहुत ही अकेले पड़ने लग गए थे उस दौरान उन्होंने फिल्मो में काम तो किया था लेकिन उन्हें इतनी पहचान नहीं मिल पाई थी इस वजह से संजय और परेशान होने लग आगये थे और उन्होंने ऋषिकेश जाने का फैसला करलिया था वह वे एक ढाबे पर काम करने लग गए थे और वह उन्हें किसी ने पहचाना भी नहीं था |

रोहित के मानाने के बाद वापस लोटे थे संजय

अपने पिता की मोत के बाद संजय इतना टूट चुके थे की उन्होंने हमेशा के लिए ऋषिकेश में रहने की थान ली थी लेकिन जब रोहित शेट्टी ने उन्हें अपनी फिल्म “आल दी बेस्ट ” के लिए मनाया तब वे वापस आये |

एक ये भी किस्सा भी

संजय जब दिल्ली से मुंबई जा रहे थे, तो उनकी मां रेलवे स्टेशन उन्हें छोड़ने आई थीं. जैसे ही रेलगाड़ी चलने लगी माताजी की आंखें भर आईं. खिड़की की सलाखें पकड़े-पकड़े तीन-चार कदम साथ चलने के बाद वो अपनी रुलाई नहीं रोक पाईं|शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा जिन बड़े सपनों को लेकर हिंदी फिल्मों की दुनिया में कदम रखने के लिए बंबई की ट्रेन में सवार है, वो साकार हो पाएंगे, लेकिन आज संजय किस मुकाम पर हैं, ये बात हर कोई जानता है|

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