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भारत का एक मात्र पहलवान जो कभी नही हारा – असली सुल्तान

हम सबने बॉलीवुड ने दबंग कहे जाने वाले ‘सलमान खान’ की सुपरहिट फिल्म ‘सुल्तान’ देखि होगी। फिल्म ‘सुल्तान’ की स्टोरी बहुत ज्यादा ही अच्छी है और रियल लाइफ के ऊपर बनी हुई फिल्म है। आप सब को जानकारी है कि हमारे भारत देश कि शान और देख का सर गर्व से ऊचा करने वाला पहलवान जिसने अपने पूरी ज़िंदगी में कोई भी कुश्ती नहीं हारी है। उस पहलवान का नाम सुन कर सभी पहलवानो का पसीना छोड़ जाता था। भारत ही नहीं उस पहलवान से विदेशो के पहलवान भी डरते थे। उस पहलवान का नाम ‘गामा पहलवान है’। आज हम आपको गामा पहलवान के बारे में जानकारिया दे रहे है।

गामा पहलवान का जन्म 1880 में पंजाब के अमृतसर जिले में हुआ था। गामा पहलवान के घर में सभी पहलवान है और गामा को पहलवानी उसके परिवार से मिली थी। गामा पहलवान ने अपने लाइफ की पहली कुश्ती केलव 10 साल की उम्र में ही कुश्ती जीती थी। और गामा पहलवान की लाइफ की पहली कुश्ती राजस्थान के जोधपुर शहर में अपने कुश्ती का प्रदर्शन किया था। और जोधपुर वासियो का दिल जीत लिया था। बाद में गामा पहलवान ने पंजाब के मशहूर रेसलर ‘माधोसिंह’ से पहलवानी को अपना उस्ताद बना लिया।

गामा ने शुरुवाती दिनों में पत्थर से बनाया अपना शरीर

आपको ये जानकर हैरानी होगी की जो कुश्ती में सबसे अच्छा पहलवान होता है उसे भारत देश ‘रुस्तम-ए-हिन्द’नाम उपादि देती है। गामा पहलवान उनमे से एक पहलवान है। गामा पहलवान को ‘रुस्तम-ए-हिन्द’ की उपादि से नवाजा जा चूका है। गमा पहलवान ने अपनी पूरी ज़िंदगी में देशी और विदेशी पहलवानो को हारा कर अपने भारत देश का नाम ऊचा किया है। गामा पहलवान ने अपने पूरी ज़िंदगी में कभी किसी पहलवान से हार नहीं मानी थी। गामा पहलवान ने अपना विशाल शरीर केवल पत्थरो से बनाया था। गामा पहलवान को लोहे वाले शरीर नाम से भी जाना जाता है। हम आजकल कुछ टाइम जिम जाकर कहते है की हमारी बॉडी नहीं बन रही है और उनदिनों में गामा पहलवान ने केवल पत्थरो से अपना विशाल और बेहतरीन शरीर बनाया था।

गामा की खुराक और कसरत

खुराक की बात की जाये तो गामा पहलवान उस समय में 10 किलो दूध में 1 किलो बादाम डाल कर पीते थे। गामा पहलवान अपने गले में पत्थर की 80 किलो की हंसली लटका कर 1 से 5000 उठक-बैठक लगाते थे। हम तो केवल 20 से 50 में ही मर जारी है। गामा पहलवान ने डंबल की जगह पत्थर का उपयोग करते थे। जो इतने भारी होते थे की नोर्मल इंसान तो उस पत्थरो को उठाने की सोचे भी नहीं सकता है । आज भी गामा पहलवान के पत्थर और औजार जिनसे वो कशरत करते थे वो पटियाला के खेल म्यूजियम में रखे हुए है।

‘रहीमबक्श पहलवान’ नामक पहलवान को हराकर बने रुस्तम-ए-हिन्द

हम आपको जानकरी दे दे की गामा पहलवान ने एक चुनौती में इलाहबाद के अंदर ‘रहीमबक्श पहलवान’ को हरा कर ‘रुस्तम-ए-हिन्द’ का ख़िताब हांसिल किया था। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दे की ‘रहीमबक्श पहलवान’ हाइट 7″फुट से भी लम्बे थे और गामा की लम्बाई 6″ फुट से भी कम थी। कईं घंटो की कुश्ती के बाद गामा पहलवान ने ‘रहीमबक्श पहलवान’ को हरा दिया था। अमेरिका के मशहूर पहलवान ‘बैंजामिन रोलर’ को केवल गामा पहलवान ने गामा केवल 1 मिनट 40 सेकंड में धूल चटा दी थी। ‘बैंजामिन रोलर’ अमेरिका के बहुत मशहूर रेसलर थे।

अंग्रेजों के समय में किया भारत का नाम रौशन

साल 1910 की इंग्लैंड में विश्वस्तरीय कुश्ती की प्रतियोगिता रखी गयी थी। उसमें गामा पहलवान का भी नाम था। गामा को नीचा दिखाने के लिए इंग्लैंड शासक ने गामा पहलवान का नाम प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया था। गामा पहलवान को इंग्लैंड शासक की ये बात बहुत बुरी लगी और गामा पहलवान ने पूरे विश्व से आए पहलवानों को खुली चुनौती दे दी की कोई भी उनके आगे 5 मिनट से ज्यादा टिक गया तो उसे नगद इनाम मेरी तरफ से मिलेगा। इसे सुन कर कुछ विदेशी पहलवान आगे आये पर गामा ने कुछ ही सेकंड में उन्हें हरा कर भारत का नाम रौशन किया।

गामा पहलवान का निधन था बहुत दर्दनाक

विश्व का इतना बड़ा कुश्तीबाज होने के बाद भी गामा पहलवान के पास उनके इलाज के पैसे नहीं थे। वह एक टूटी हुए छोटे से मकाम में रहते थे। गामा पहलवान ने अपने अंतिम समय में अपने सोने और चाँदी के पुरुस्कार बेच कर अपना घर चलाया। जब उनके चाहने वालों को और पटियाला के नरेश को उनकी दशा का पता चला तो उन्होंने पैसे भेजना शुरू किया परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। साल 1960 में गामा का निधन हो गया। वो दिन भारत देश के लिए बहुत बुरा दिन था।

 

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